मां गायत्री की कथा गायत्री जयंती ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को तो कहीं एकादशी के दिन मनायी जाती है वहीं कहीं पर यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन भी मनाई जाती है। गायत्री जयंती पर्व मां गायत्री देवी का जन्मोत्सव है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन मां गायत्री का अवतरण हुआ था। शास्त्रों में मां गायत्री को वेद माता के नाम से जाना जाता है। वेदों की उत्पत्ति मां गायत्री से ही हुई है। गायंत्री मंत्र में ही चारों वेदों का सार है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अकेले गायत्री मंत्र में ही चारों वेदों का ज्ञान है। गायत्री जयंती के दिन मां गायत्री का जाप अवश्य करें, शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी के मुख से गायत्री मंत्र प्रकट हुआ था। मां गायत्री की कृपा से ब्रह्माजी ने गायत्री मंत्र की व्याख्या अपने चारों मुखों से चार वेदों के रूप में की थी। आरम्भ में मां गायत्री की महिमा सिर्फ देवताओं तक ही थी, लेकिन महर्षि विश्वामित्र ने कठोर तपस्या कर मां की महिमा अर्थात् गायत्री मंत्र को जन-जन तक पहुंचाया था। एक प्रसंग के ...
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