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हनुमान बालपन

हनुमान जी का बालपन की कथा  ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ हनुमान जी के धर्म पिता वायु थे, इसी कारण उन्हे पवन पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। बचपन से ही दिव्य होने के साथ साथ उनके अन्दर असीमित शक्तियों का भण्डार था। बालपन में एक बार सूर्य को पका हुआ फ़ल समझकर उसे वो उसे खाने के लिये उड़ कर जाने लगे, उसी समय इन्द्र ने उन्हे रोकने के प्रयास में वज्र से प्रहार कर दिया, वज्र के प्रहार के कारण बालक हनुमान कि ठुड्डी टूट गई और वे मूर्छित होके धरती पर गिर गये।  इस घटना से कुपित होकर पवन देव ने संसार भर मे वायु के प्रभाव को रोक दिया जिसके कारण सभी प्राणियों मे हाहाकार मच गया।  वायु देव को शान्त करने के लिये अंततः इन्द्र ने अपने द्वारा किये गये वज्र के प्रभाव को वापस ले लिया। साथ ही साथ अन्य देवताओं ने बालक हनुमान को कई वरदान भी दिये। यद्यपि वज्र के प्रभाव ने हनुमान की ठुड्डी पे कभी ना मिटने वाला चिन्ह छोड़ दिया। तदुपरान्त जब हनुमान को सुर्य के महाग्यानि होने का पता चला तो उन्होंने अपने शरीर को बड़ा करके सुर्य की कक्षा में रख दिया और सुर्य से वि...