नरसिंह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार नरसिंह अवतार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से चतुर्थ अवतार हैं जो वैशाख में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अवतरित हुए। पृथ्वी के उद्धार के समय भगवान ने वाराह अवतार धारण करके हिरण्याक्ष का वध किया। उसका बड़ा भाई हिरण्यकशिपु बड़ा रुष्ट हुआ। उसने अजेय होने का संकल्प किया। सहस्त्रों वर्ष बिना जल के वह सर्वथा स्थिर तप करता रहा। ब्रह्मा जी सन्तुष्ट हुए। दैत्य को वरदान मिला। उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। लोकपालों को मार भगा दिया। स्वत सम्पूर्ण लोकों का अधिपति हो गया। देवता निरूपाय थे। असुर को किसी प्रकार वे पराजित नहीं कर सकते थे। हिरण्यकशिपु के चार पुत्र थें । एक दिन सहज ही अपने चारों पुत्रों में सबसे छोटे प्रह्लाद से पूछा -बेटा, तुझे क्या अच्छा लगता है ? प्रह्लाद ने कहा - इन मिथ्या भोगों को छोड़कर वन में श्री हरि का भजन करना ये सुनकर हिरण्यकशिपु बहुत क्रोधित हो गया , उसने कहा - इसे मार डालो। यह मेरे शत्रु का पक्षपाती है। असुरों ने आघात किया। भल्ल...
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