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एकादशी व्रत कथा

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष में चौबीस एकादशियां होती हैं।  ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में भोजन करना और पानी पीना वर्जित है। इसीलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं।  धर्मग्रंथों के अनुसार इस एकादशी पर व्रत करने से वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य मिलता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 29 मई, शुक्रवार को है। व्रत विधि निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर सर्वप्रथम शेषशायी भगवान विष्णु की पंचोपचार पूजा करें। इसके बाद मन को शांत रखते हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।  शाम को पुन: भगवान विष्णु की पूजा करें व रात में भजन कीर्तन करते हुए धरती पर विश्राम करें। दूसरे दिन किसी योग्य ब्राह्मण को आमंत्रित कर उसे भोजन कराएं तथा जल से भरे कलश के ऊपर सफेद वस्त्र ढक कर और उस पर शर्करा (शक्कर) तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें। इसके अलावा यथाशक्ति अन्न, वस्त्र, आसन, जूता, छतरी, पंखा तथा फल आदि का दान करना चाहिए। इसके बाद स्वयं भोजन करें। धर्म ग्रंथों के...