माता तुलसी की कथा ~~~~~~~~~~~~~~~~ एक बार देवराज इंद्र देवगुरू बृहस्पति के साथ भगवान शिव का दर्शन करने कैलाश गए, महादेव ने दोनों की परीक्षा लेनी चाहिए इसलिए रूप बदलकर अवधूत बन गए, उनके शरीर पर कोई वस्त्र न था | उनका शरीर जलती हुई अग्नि के समान धधक रहा था और अत्यंत भयंकर नजर आते थे| अवधूत दोनों के रास्ते में खड़े हो गए| इंद्र ने एक विचित्र पुरुष को रास्ते में खड़े देखा तो चौंके. इंद्र को देवराज होने का गर्व घेरने लगा. उन्होंने उस भयंकर पुरुष से पूछा तुम कौन हो? भगवान शिव अभी कैलाश पर विराज रहे हैं या कहीं भ्रमण पर हैं| मैं उनके दर्शन के लिए आया हूं | इंद्र ने कई प्रश्न किए लेकिन वह पुरुष योगियों के समान मौन ही रहे. इंद्र को लगा कि एक साधारण प्राणी उनका अपमान कर रहा है. उनके मन में देवराज होने का अहंकार उपजा जो क्रोध में बदल गया | इंद्र ने कहा मेरे बारबार अनुरोध पर भी तू कुछ नहीं बोलकर मेरा अपमान कर रहा है |मैं तुझे अभी दंड देता हूं. ऐसा कहकर इंद्र ने वज्र उठा लिया, भगवान शिव ने वज्र को उसी समय स्तंभित यानी जड़ कर दिया| इंद...
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